"आत्मार्थी ट्रस्ट"

अनंत तीर्थंकर, भगवंतों, गणधरों, आचार्यों एवं ज्ञानी महात्माओं से आई अहम परम्परा का तत्वज्ञान वर्तमान में हमें पूज्य गुरूदेव श्री कानजी स्वामी के करण उपकारों से प्राप्त हुआ। तत्वज्ञान की इस अध्यात्म क्रांति को देश की राजधानी दिल्ली महानगर में समुचित प्रचार प्रसार के लिए दिल्लीवासी मुमुक्षुओं के द्वारा एक जिनायतन संकुल के निर्माण की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। पूज्य गुरूदेव श्री कानजी स्वामी के 110वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में उपकार दिवस का भव्य आयोजन शाह ऑडिटोरियम दिल्ली में 18 अप्रैल 1999 को दिल्ली के मुमुक्षओं द्वारा किया गया जहां लगभग 1000 आत्मार्थी बंधुओं की उपस्थिति में दिल्ली महानगर में आत्म साधना हेतु एक केन्द्र बनाने का निर्णय किया गया। इस पवित्र भावना की पूर्ति के लिए श्री दिगम्बर जैन कुन्द कुन्द कहान "आत्मार्थी ट्रस्ट" की स्थापना कर ट्रस्ट द्वारा 24 सितम्बर 1999 को प्रकृति के सुरम्य शांत वातावरण में लगभग 3 एकड़ भूमि को क्रय किया गया और दिनांक 3 फरवरी 2001 को सम्पूर्ण भारत के सैकड़ों मुमुक्षुओं की स्नेहमयी उपस्थिति में श्री महावीर स्वामी जिन मन्दिर, श्री रत्नत्रय जिन मन्दिर, श्री सीमंधर विद्यमान बीस तीर्थंकर समवशरण जिनमन्दिर, श्री कुंद कुंद कहान स्वाध्याय भवन, श्री धरसेनाचार्य सरस्वती भवन, रत्नत्रय निलय, आत्मार्थी वात्सल्य भोजनालय एवं कहान निवृत्ति निलय की मंगल शिलान्यास विधि की गई। जनवरी 2005 में यह भव्य संकुल अपने मनोरम रूप में साकार हो गया, जिसकी प्रतिष्ठा महोत्सव श्री आदिनाथ दिगम्बर जिनबिम्ब पंचल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के रूप में दो हजार साधर्मी बंधुओं की साक्षी में 7 से 13 फवरी 2005 तक आयोजित किया गया।