गतिविधियाँ

  • वीतरागी सर्वज्ञ जिनेन्द्रप्रभु के जिनबिम्बों का नित्य प्रक्षालन, पूजन एवं भक्ति आयोजन करना।
  • भवोदधि तारक श्री जिनेन्द्र की वाणी का नित्य अध्ययन, स्वाध्याय प्रवचन एवं कक्षाओं का संचालन।
  • अष्टान्हिका आदि महापर्व के अवसर पर दिल्ली एवं संपूर्ण भारतवर्श में साधर्मी बंधुओं की आवश्यकतानुसार पूजन, विधान, प्रवचन एवं शिक्षण शिविर हेतु विधानाचार्य व प्रवचनकार विद्वान् उपलब्ध कराना।
  • आचार्य कुन्दकुन्ददेव की आम्नायानुसार शुद्ध तेरहपंथ की मान्यता वाले नवनिर्मित एवं जीर्णोद्वारित जिनमन्दिरों में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा तथा वेदी शुद्धि प्रतिष्ठा महोत्सव आदि के कार्यक्रम सम्पन्न कराना।
  • वर्ष 2007 से पूज्य गुरूदेव श्री कानजी स्वामी की जन्म जयंती को उपकार दिवस के रूप में मनाना, उपकार दिवस पर आठ दिन के आध्यात्मिक शिक्षण शिविर का भव्य आयोजन। देश के प्रमुख विद्वानों को प्रवचन, कक्षा हेतु आमंत्रित करना।
  • दशलक्षण महापर्व के अवसर पर दिल्ली महानगर के विभिन्न जिनालयों तथा समीपस्थ नगरों, ग्रामों में प्रवचन हेतु लगभग 50 विद्वानों को भेजने की व्यवस्था करना एवं क्षमावाणी पर्व के अवसर पर सामूहिक क्षमावाणी एवं विद्वत् सम्मान समारोह का आयोजन करना।
  • बालिकाओं को उच्चस्तरीय लौकिक शिक्षा के साथ आध्यात्मिक नैतिक एवं धार्मिक संस्कारों का ज्ञान देने के लिए आत्मार्थी कन्या विद्या निकेतन की 2008 में स्थापना की गई। वर्तमान में 60 छात्राएं विद्या निकेतन में सर्वसुविधाओं के साथ शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।
  • दिल्ली महानगर में अनेक स्थानों पर दैनिक एवं साप्ताहिक वीतराग विज्ञान पाठशाला एवं स्वाध्याय सभाओं का संचालन किया जा रहा है।
  • ग्रीष्म एवं शीतकालीन अवकाश पर दिल्ली में बाल संस्कार शिविर आयोजित किये जाते हैं।
  • पूज्य आचार्यों द्वारा रचित ग्रंथों, विधानों एवं विद्वानों से लिखित सत्साहित्य का प्रकाशन।